मानसून सत्र से पहले विपक्ष ने मणिपुर को लेकर खूब हंगामा किया। जिसके कारण मानसून सत्र के पहले दिन दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हुआ। विपक्ष की मांग है कि पीएम मोदी मणिपुर पर संसद में बयान दें। इधर विपक्ष के सदस्य गैलरी में जमा हो गये और मणिपुर की घटनाओं को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सभी आसन के इर्दगिर्द आ गये। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मानसून सत्र के लिए रणनीति बनाने के लिए गुरुवार को संसद परिसर में मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में मुलाकात की। इसके बाद विपक्ष ने दोनों सदनों में मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की मांग की। मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मामले पर स्थगन नोटिस भी दिया। उन्होंने कहा कि मणिपुर में जातीय हिंसा भड़के लगभग 80 दिन हो गए हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ना तो राज्य का दौरा किया है और न ही वहां की स्थिति पर एक शब्द भी बोला है। साथ ही खड़गे ने ट्विटर पर यह भी कहा कि मणिपुर जल रहा है। महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है। उन्हें नग्न घुमाया जा रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री इतने लंबे समय से चुप हैं। खरगे ने मणिपुर हिंसा के मुद्दे को राज्यसभा में भी उठाया और मांग की कि प्रधानमंत्री मोदी के इस मामले पर बयान देने के साथ ही मणिपुर की स्थिति पर चर्चा की जाए। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री के पास फ्रांस, अमेरिका का दौरा करने का समय है। उनके पास 38 पार्टियों (एनडीए बैठक) को बुलाने का समय है, लेकिन उनके पास मणिपुर जाने का समय नहीं है। जबकि उनके पास सभी संसाधन हैं। मोदी सरकार और भाजपा ने राज्य के नाजुक सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करके लोकतंत्र और कानून के शासन को भीड़तंत्र में बदल दिया है।