रामेश्वर राइस मिल मामले पर जांच का आदेश दे दिया गया हैं। दरअसल जिला प्रशासान की टीम मंगलवार (17 दिसंबर) को रामेश्वर राइस मिल (जामताड़ा) पर छापेमारी करने पहुंची थी। इस दौरान बड़ी संख्या में रिपब्लिक ऑफ बांग्लादेश छपी चावल की बोरियां बरामद हुई हैं। इसी मामले को संज्ञान में लेते हुये स्वास्थ्य सह खाद एवं आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने जांच के आदेश दे दिये हैं। उन्होंने कहा कि राइस मिल की आड़ में गरीब लोगों की हक के चावल को बांग्लादेश भेजा जा रहा हैं। रिपब्लिक ऑफ बांग्लादेश लिखी चावल की बोरी मामले में दोषियों की पहचान होनी चाहिए। रांची से जांच टीम कल (गुरुवार) को जामताड़ा पहुंच रही हैं। जो जांच कर इस मामले पर रिपोर्ट देगी।
उन्होंने कहा कि गरीब लोगों के मुंह से जिसने भी निवाला छिनने का काम किया है, उसे बख्शा नहीं जायेगा। जो चावल गरीबों को मिलती उसे राइस मिल में खपाया जा रहा था। फिर मिल में चावल की पॉलिश कर तस्करी की जाती थी।
उन्होंने कहा कि जिस शख्स का यह राइस मिल है, वह पूर्व में बांग्लादेश में दवा तस्करी करते पकड़ाया था। और जेल भी गया हैं। उसी व्यक्ति का रामेश्वर राइस मिल हैं। चावल तस्करी के साथ-साथ टेरर फंडिंग और राइस मिल मालिक के बांग्लादेश कनेक्शन की भी जांच होगी। उन्होंने कहा कि सवाल यह भी है कि आखिर मिल तक एफसीआई और पीडीएस के चावल कैसे पहुंच रहे थे।
ज्ञात हो कि जामताड़ा उपायुक्त कुमुद सहाय को लगातार चावल खपाने को लेकर शिकायतें मिल रही थी। जिसके बाद उन्होंने एक छापामारी दल गठित किया। जब छापामारी दल रामेश्वर राइस मिल पहुंची , तो सभी दंग रह गये। उन्होंने मिल में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी प्रिंट वाला चावल का बोरा बरामद किया।
टीम के सदस्यों को भी अंदाजा नहीं था कि इतनी बड़ी संख्या में एफसीआई और जन वितरण प्रणाली वाले चावल को रिपब्लिक ऑफ बांग्लादेश छपी की बोरियों में भर कर बांग्लादेश भेजने का खेला किया जा रहा हैं। बता दें कि छापामारी करने के बाद कल ही मिल को सील कर दिया गया हैं। एफसीआई और पीडीएस के चावल मामले पर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैेसे-वैसे प्रशासनिक और संबंधित विभाग के पदाधिकारी भी नपेगे।